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मंगलवार, 16 फ़रवरी 2021

प्रेम का इज़हार - आज के परिप्रेक्ष्य में

 



प्रेम का इज़हार - आज के परिप्रेक्ष्य में*



आज के परिप्रेक्ष्य में यदि प्रेम के इज़हार की बात की जाए, तो  लड़का / लड़की अपने साथी से बेहिचक अपने दिल की बात करते अपने प्रेम का इज़हार करते मिल जाएंगे। कितना आसान हो गया है न आज के परिप्रेक्ष्य में अपने प्रेम का इज़हार करना। संचार सुविधाओं ने तो आज प्रेम के इज़हार को और भी आसान बना दिया है। ना केवल अपने प्रेम का इज़हार बल्कि, अपने दिल की हर बात अपने साथी को खुले शब्दों में आज के युवा बेहिचक कर रहे हैं। 


ये पहले के समय में इतना आसान नहीं हुआ करता था। कई तो ताउम्र अपने प्रेम का इज़हार नहीं कर पाते थे और कई इंतज़ार करते रह जाते कि सामने वाला उससे अपने प्रेम का इज़हार करेगा। कुछ को अपने प्रेम का इज़हार करने में इतना समय लग जाता कि सामने वाला किसी और का दामन थाम चला जाता तो कोई इतनी देर से अपने प्रेम का इज़हार कर पाता कि सामने वाला पहले ही किसी और के साथ वचनबद्ध हो चुका होता।


पहले के ज़माने में प्रेम को निभाने की शिद्दत भी गज़ब की हुआ करती थी। व्यक्ति किसी एक से प्रेम के बंधन में बंध गया तो ताउम्र उस प्रेम के बंधन को निभाता, चाहे वो प्रेम उसे हासिल हो या न हो।ऐसे ही प्रेम के कुछ किस्से प्रेम की मिसाल के रूप में जाने जाते है। राधा कृष्ण का पवित्र प्रेम तो मिसाल है, प्रेम की। बाद के समय में लैला मजनू, हीर रांझा और भी कई प्रेम के मिसाल हुए हैं।


वर्तमान में प्रेम का इज़हार जितना आसान हुआ है, प्रेम के रूप में भी उतना ही परिवर्तन देखने को मिला है।वर्तमान परिप्रेक्ष्य में प्रेम के इज़हार के बाद भी ज़रूरी नहीं कि उस प्रेम की उम्र ताउम्र रहेगी। और ऐसे भी मिसाल आज देखने को मिलते हैं कि व्यक्ति आभासी दुनिया में अपने प्रेम के इज़हार के बाद प्रभासी दुनिया में भी अपने प्रेम को शिद्दत से निभाता है।


चाहे समय कितना भी बदल जाये , चाहे बीते कल की बात हो या आज की, प्रेम का नाम सुनते ही मन की कलियाँ खिल उठती हैं और मन सकारात्मक ऊर्जा से भर उठता है। प्रेम का इज़हार चाहे साथी से हो या माँ से या पिता से या पुत्र/पुत्री से , बहुत ज़रूरी है प्रेम का इज़हार करना। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में रिश्तों में प्रेम का इज़हार और भी ज्यादा जरूरी हो गया है, क्योंकि अब समय अपने मनोभावों को सामने वाले के सामने प्रकट करने का है। वो समय गया जब लोग मन ही किसी के प्रति अपने प्रेम को समझ पाते हैं। जहां हर तरफ दुनिया में खुले रूप से अपने मनोभावों को प्रकट करने की होड़ सी लगी हुई है वहाँ हर रिश्तों में उसके प्रेम को इज़हार करने की भी नितांत आवश्यकता है। 

✍️तोषी गुप्ता ✍️

छत्तीसगढ़

14/02/2021

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ऋतुराज बसन्त

 




*ऋतुराज बसन्त*




मन्द मन्द बहती बसन्ती बयार,


जैसे कहती हों, कानों में कुछ आज,




बिखर रही चहुँ ओर हरियाली,


पीली सरसों और गेहूँ की बाली,




गूँज रही कोयल की कूक,


चिड़ियों की चहचहाहट मधुर,




लाल-पीले फूलों की बगिया,


भँवरे की गूँजन से गूँजे वादियाँ,




फूले पलाश की नारंगी कलियाँ,


आम की बौर से लदी डालियाँ




प्रिय से मिलने को आतुर मन,


ये है ऋतुराज बसन्त का आगमन,




✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻

 छत्तीसगढ़

15/02/2021

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बुधवार, 10 फ़रवरी 2021

*किसी मोड़ पर*

 *किसी मोड़ पर*




किसी मोड़ पर कदम जब मेरे लड़खड़ा जाएं,


साथी बन तुम साथ मेरे आ जाना,




किसी मोड़ पर मेरा आत्मविश्वास कमज़ोर पड़ जाए,


हौसला बन तुम मेरा आत्मविश्वास बन जाना,




किसी मोड़ पर जब मैं गलत राह पर बढ़ जाऊँ,


सारथी बन तुम मुझे राह दिखाना,





किसी मोड़ पर जब मैं अपनी जिम्मेदारी भूल जाऊँ,


मार्गदर्शक बन तुम मुझे, मेरी जिम्मेदारी याद दिलाना,




किसी मोड़ पर जब मैं अहम में पड़ जाऊँ,


वहम तोड़ तुम मेरा आईना बन जाना, 




किसी मोड़ पर जब मैं स्वार्थी बन जाऊँ,


कर निबाह तुम अपनी जिम्मेदारियों का मुझे एहसास कराना,




किसी मोड़ पर कदम जब मेरे लड़खड़ा जाएं,


साथी बन तुम साथ मेरे आ जाना,



✍️तोषी गुप्ता✍️

10/02/2021

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मंगलवार, 9 फ़रवरी 2021

जीने का अंदाज़ कुछ यूँ भी,,,

 *जीने का अंदाज़ कुछ यूँ भी*




ज़िन्दगी जीने अंदाज़ कुछ यूँ रखो,


कोई कदम पीछे भी खीँचे तो मंज़िल दूर ना हो,




अपने लक्ष्य पर ध्यान कुछ इस तरह रखो कि,


राह में रोड़े कोई लाख लगाए, लक्ष्य से तुम कभी ना भटको,




रिश्ते पूरी शिद्दत से कुछ इस तरह निभाओ कि,


कोई गलतफहमी रिश्तों को तोड़ ना पाए,




लोगों में खुशियां कुछ इस तरह बांटों कि,


कोई न तुमसे नाराज़ रहने पाए,




अपनी बात लोगों के सामने कुछ इस तरह रखो,


कोई तुमसे विमुख होने ना पाए,




दोस्तों से दोस्ती कुछ इस तरह निभाओ,


हो जाए कभी अनबन तो भी दोस्ती ना टूटने पाये,




ज़िन्दगी जीने का अंदाज़ कुछ यूँ रखो,


ज़िन्दगी का हर एक पल फिर से जी जाने को जी करे,






✍️तोषी गुप्ता✍️

06 फरवरी 2021

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*संगठन में शक्ति होती है,*

 *संगठन में शक्ति होती है,* 

और संगठन की इस शक्ति को हम प्रकृति के द्वारा बेहतर समझ सकते हैं। जैसे चींटियाँ , हमेशा समूह में रहकर कार्य करती हैं, और समूह में ये असंभव कार्य भी कर लेती हैं, जैसे अपने से कई गुना भारी और बड़े भोजन को अपने गंतव्य तक ले जाना। इसी तरह मधुमख्खियाँ, जो समूह में कार्य कर कुछ ही मिनटों में अपने लिए छत्ता तैयार कर लेते हैं और समूह में कार्य कर ही इतनी अधिक मात्रा में शहद इकट्ठा कर लेती हैं। शहद एकत्रित करने वालों को भी इसी संगठन की शक्ति से अपने छत्तों से दूर रखती हैं। 1-2 नहीं सभी मधुमख्खियाँ संगठित होकर शहद एकत्रितकर्ता पर टूट पड़ती हैं। इसी तरह पेड़ों का ढेरों समूह जीवनदायिनी वर्षा का कारण बनता है। संयुक्त परिवार भी इसके उदाहरण हैं जो एकल परिवार से हमेशा अधिक सुरक्षित और सुखी माने जाते हैं। ये अन्तरा परिवार भी इसका उदाहरण है , जिसमें अब हम सब संगठित होकर साहित्य की ख़ुशबू देश के कोने कोने तक बिखेर रहे हैं। ऐसे कितने ही उदाहरण मिल जाएंगे , सीमा पर मुस्तैदी से डटे हुए हमारे सैनिक जो संगठित होकर साथ रहते हैं और दुश्मन से हर पल हमारी रक्षा करते हैं। ये सब संगठन से ही संभव है। इन सब के कारण ही कहा गया है

*संगठन में शक्ति होती है*


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संस्कार



 *बुनियाद*


*संस्कार*


शान्तनु टेबल पर सर झुकाए अपने फाइलों में व्यस्त था। तभी 2 व्यक्ति टेबल के सामने रखी चेयर में आकर बैठते हुए बोले, कैसे हैं शान्तनु बाबू। हमारे काम का कुछ हुआ। शान्तनु ने सर उठा कर देखा, दोनों व्यक्तियों ने एक फाइल और एक पैकेट शान्तनु की तरफ बढ़ाते हुए कहा, अब मान भी जाइये शान्तनु जी, इन फाइलों में सिग्नेचर कर दीजिए।कब तक ईमानदारी की राह में चलते हुए आप अपनी तरक्की रोकेंगे। आप भी तरक्की कीजिये और हमें भी तरक्की का मौका दीजिये। सहसा शान्तनु की आंखों के सामने उसके परिवार की सारी ज़रूरतों का दृश्य घूम गया। बाबूजी का मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराना था, माँ के घुटने का ऑपरेशन अब ज़रूरी हो गया था। बेटी का एक बड़े इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला करवाना था, और बेटे की स्कूल की फ़ीस भरनी थी, अब उनकी और स्वाति की तबियत भी तो खराब रहने लगी थी। फिर 2 साल ही तो बचे हैं उनके रिटायरमेंट को। मन तो हो रहा था, तुरंत पैकेट उठा कर रख ले, और फाइलों में सिग्नेचर कर दे। लेकिन शान्तनु ने हाथ जोड़कर विनम्रता से उन्हें मना कर दिया। शान्तनु अब उन्हें वापस जाते हुए देख रहा था, और सोच रहा था आज बाबूजी के बुनियादी संस्कारों की वजह से ही मैं ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन कर पा रहा हूँ। और साथ ही उसने एक कंपनी में पार्ट टाइम जॉब के लिए आवेदन भेज दिया और स्वयं से बातें करने लगा कि, आय तो बढ़ानी पड़ेगी लेकिन अपनी आय बढ़ाने के लिए वो ग़लत रास्ता कभी नहीं अपनाएगा।

09/02/2021


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बुधवार, 3 फ़रवरी 2021

तुम हो तो मैं हूँ,,,,

 *तुम हो तो मैं हूँ*




तुम हो तो मैं हूँ,


तुमसे ही शुरू,


तुमसे ही ख़त्म हूँ मैं,





जीवन के इस वाद्यवृन्द में,


तुम्हारे हर साज की 


आवाज़ हूँ मैं,





घनी दरख्त के समान तुम, 


और तुम्हारी मजबूत शाखाओं से


निकली लताएं हूँ मैं,





तुमसे ही पहचान मेरी,


जीवन की डोर तुमसे बंधी,


तुम्हारे जीवन के साँसों की आवाज़ हूँ मैं,





तुमसे मैं, 


मुझसे , मेरा ये जीवन,


मेरे वज़ूद की पहचान हो तुम,





शून्य से शुरू,


ज़िन्दगी के सफ़र में,


मेरी चाहतों की मंज़िल हो तुम,






हाँ, 


तुम हो तो मैं हूँ,,,,


हाँ, तुमसे ही तो मैं हूँ,,,,



✍️तोषी गुप्ता✍️

03/02/2021

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