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बुधवार, 21 जुलाई 2021

कुछ पल अपने लिए

 कुछ पल अपने लिए




सुबह की पहली सुनहरी किरण को,


आंखों  में समा लेती हूँ,


रोज़ सुबह सबके उठने के पहले ,


कुछ इन पलों को अपने लिए जी लेती हूं,





किचन में सबके लिए नाश्ता बना,


सबका टिफ़िन भी तैयार कर देती हूँ,


फिर एक कप चाय खुद के लिए बना,


बालकनी में जा कुछ पल अपने लिए जी लेती हूं,





पति और खुद के ऑफिस की है भागमभाग,


बच्चों के बस की भी है चिंता,


इस बीच आईने के सामने जा बिंदी और सिन्दूर लगाते,


खुद को निहार कुछ पल अपने लिए जी लेती हूं,





ऑफिस की फाइलों के ढेर को निपटा,


सहकर्मियों के भी काम में हाथ बँटा देती हूँ,


ऑफिस से लौटते ट्रेन की खिड़की से बाहर निहारते,


जज्बातों को डायरी में उतारते कुछ पल अपने लिए जी लेती हूं,





घर पहुँच कर बच्चों का होमवर्क कराती,


पतिदेव को चाय और पकोड़े परोसती,


शाम की आरती में आंखें बंद कर,


 कुछ पल अपने लिए भी जी लेती हूं,





बच्चों की दिन भर की खुशी में खुश होती,


रात को पति के कांधों पर सर रख सुकून का अहसास करती,


दिन भर के पलों से कुछ पल अपने लिए चुराती,


सच में कुछ पल अपने लिए जी लेती हूं,





✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻


21-07-2021

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शनिवार, 17 जुलाई 2021

दोस्तों का साथ


 

दोस्तों का साथ




हाथों में हाथ हो,


दोस्तों का साथ हो,


ज़िन्दगी भी खुशहाल हो,


ज़िन्दगी का हर पल बहार हो,




चाहे कितनी भी आएं मुश्किलें,


हर हाल में खुशी खुशी जी लेंगे,


चाहे कितनी भी आये रुकावटें,


सब दोस्त मिल आगे बढ़ जाएंगे,




एक- दूजे का हाथ थामे,


एक दूजे का सहारा बनते जाएंगे,


एक जो गिरा लड़खड़ा कर,


उसकी बैसाखी बन जाएंगे,




मंजिल चाहे अलग हो,


साथ ही आगे बढ़ना है,


साथी की राह में जो आये मुश्किल,


सबको मिलकर सुलझाना है,




एक दूजे से ना ईर्ष्या ना बैर,


ना ही कोई मत भेद,


हर हालात का करना है सामना,


बिना आपस में कोई मनभेद,




साथ मिलकर जीवन में अपने,


हर कदम साथ आगे बढ़ाएंगे,


एक दूजे के सुख दुख का साथी बनकर,


एक सुखद जीवन बिताएंगे,





✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻


17-07-2021

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बुधवार, 14 जुलाई 2021

गीत कोई गुनगुनाओ

 गीत कोई गुनगुनाओ



सूनी सूनी सी कक्षाएं,


सूना सूना सा ये खेल का मैदान,


बच्चों की राह ताकता,


स्कूल हो गया है वीरान ,


ये सूना ब्लैकबोर्ड,


और सूना कॉरिडोर,


वो कैंटीन का कोना,


और लाइब्रेरी की पुस्तकें,


वो लैब की शांति,


वो स्पोर्ट्स रूम की तुम्हारी मस्ती,


वो स्कूल की घंटी,


वो प्रेयर की गूंज,


वो स्कूल में तुम संग उत्सव मनाना,


हर त्यौहार का दोबारा मज़ा लेना,


वो एनवल फंक्शन की रौनक,


वो स्पोर्ट्स डे के कॉम्पिटिशन,


वो राष्ट्रीय त्योहारों का आनंद,


वो बैंड की धुन, वो बूंदी का पैकेट,


सब कुछ बहुत याद आता है ,


बार बार दिन उस समय को याद करता है,


तुमसे ही तो बच्चों रौनक थी,


हर शिक्षक की तुमसे ही पहचान थी,


गीत कोई गुनगुनाओ अब तुम,


स्कूल लौट आओ अब तुम,


थक गई आंखें अब  इसऑनलाइन पढ़ाई से,


दिल मचलता है अब , प्यारे बच्चों मिलने को तुमसे,





✍️तोषी गुप्ता✍️

14-07-2021





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अनुभूति

 अनुभूति




आज पिता अनिल की आंखों में खुशी के आंसू थे । बिटिया श्रुति को आई आई टी पलक्कड़ (केरल) से एम टेक करने स्कोलरशिप मिली थी।



 कितने परेशान हो रहे थे वो तीन बेटियां और उनकी आर्थिक स्थिति। गांव में एक  रेडियो और पंखे बनाने की एक छोटी सी दुकान थी,और  थोड़ी खेतीबाड़ी। बमुश्किल सबकी ज़रूरतें पूरी हो पाती। बेटियों की पढ़ाई अच्छे से हो इसलिए पिता गांव में अकेले रहकर काम करते और पत्नी और बच्चों को पढ़ने शहर भेज दिया। बेटियां भी एक से बढ़कर एक होनहार और पढ़ाई में तेज। 



बड़ी बेटी श्रुति पूरे प्रदेश में अव्वल थी। बारहवीं में मेरिट में प्रथम स्थान प्राप्त किया था उसने। मेरिट में आने पर उसे बहुत सारे उपहार भी प्राप्त हुए थे शासन की ओर से। लेकिन उच्च शिक्षा के लिए पर्याप्त ना थे।वो बी टेक कर रही थी लेकिन अब भी पिता श्रेया की उच्च शिक्षा को लेकर थोड़े चिंतित थे।



 आज इस खबर ने मानों पूरे परिवार को सुखद अनुभूति से सराबोर कर दिया। श्रेया के भविष्य को लेकर पिता निश्चिंत थे। और खुद श्रेया भी स्कॉलरशिप मिलने से बहुत खुश और निश्चिंत थी।




✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻


13-07-2021

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शुक्रवार, 9 जुलाई 2021

एक नई सुबह

 एक नई सुबह




आज मौसम बड़ा खुशगवार है,


ये खूबसूरत सुबह,


गुनगुनाती धूप


और उस पर 


ये बालकनी में 


चाय की चुस्कियों के साथ


अख़बार की ख़बरें


पास ही झूला झूलते


छोटी बहन की हंसी


मेरी छोटी सी फुलवारी में


फुदकती नन्हीं चिड़िया


नीले आसमान की खूबसूरती


ठंडी हवा की मादक बयार


बालकनी से दिखती 


वो सुंदर सड़क


चाय की गुमटी पर गप्पें मारते


वो लड़के-लड़कियों का झुंड


सड़क किनारे लगे ताज़े फलों के ठेले


दूजी ओर ताजी सब्जियों की पंक्ति


अंदर  किचन से आती मम्मी की आवाज़


बीच बीच में पापा की गुनगुनाने की आवाज़


कभी भाई का आकर चिकोटी काट जाना


कभी दोनों छोटों का आपस में लड़ना


ऐसा लगा जैसे सब कुछ नया हो,


जैसे इस सुबह की हर बात निराली हो,


ऐसा नहीं कि ये सब पहली बार हो


दिन वही था, लोग वही थे


बस बदला था कुछ मेरे साथ


हुआ यूँ कि 


मोबाइल मेरा बिगड़ गया


और खूबसूरत ये दिन दिखा गया


काफी दिनों बाद आज


बालकनी में आना हुआ


मोबाइल से परे भी एक दुनिया है


ये जानना हुआ


मोबाइल की आभासी दुनिया में 


रात दिन जहाँ कटते थे


हर रिश्ते भी जहाँ


मोबाइल पर ही निभते थे


आज ये जानना हुआ


ये दुनिया कितनी प्यारी है एहसास हुआ


अब ठाना मन में एक बात


मोबाइल को ना बनने देंगे 


अपनी हसीं दुनिया की फांस


करके मोबाइल का सीमित उपयोग


करेंगे समय का भी सदुपयोग






✍️तोषी गुप्ता✍️

09-07-2021

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लौट आओ न

 लौट आओ न




देख कर बेटे की सफलता


पिता फुले नहीं समा रहे थे


आखिर बेटा अव्वल था


पूरे प्रदेश में,


जमा पूंजी सब इकट्ठी करके


लगा दिए बेटे का भविष्य सँवारने


होनहार बेटे की


हर कदम पर सफलता देखने


दिन प्रतिदिन आगे बढ़ता बेटा


पिता का नाम रोशन करता


अब बेटा बड़ा अफ़सर बनकर


खूब कमाई भी करता


गाँव की गलियां अब छूटी,


और छूट गए बचपन के यार,


हर कदम पर जो साथ रहते,


उसकी हर सफलता पर खूब तालियाँ बजाते,


बेटा अब रंग चुका था


शहर के रंग में


अपनी व्यस्त दिनचर्या और


गुलाबी शाम के संग में


जिस पिता के साथ अपनी हर खुशी बाँटता


आज उसी पिता से बात करने से कतराता


पिता आस लगाए राह देखते


सूनी गलियों में अपने बेटे के आने की राह ताकते


हर पल हर दिन जिसने अपने बेटे की


हर खुशी चाही,


आज उसी बेटे ने उनकी,


कोई परवाह ना करनी जानी,


पिता की आँख उसे देखने को तरसती 


"लौट आओ न बेटा" हर पल कहकर


अब उनकी ज़िंदगी कटती






✍️तोषी गुप्ता✍️


09-07-2021


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तुम्हारा प्रेम

 तुम्हारा प्रेम



अपने प्रेम के मोहपाश में,


बांध लो मुझको इस तरह,


मिल जाये रूह से रूह,


और लोगों को ख़बर भी ना हो किसी तरह,


डूब जाऊँ तुम्हारे प्रेमरस में,


जैसे राधा डूबी कृष्णा संग,


सारी रात रास रचाये,


प्रेमरस में भीग जाए अंग अंग,


पनाह पाऊँ तुम्हारे आगोश में,


खिल जाऊँ पाकर साथ तुम्हारा,


सर झुका के तुम्हारे सजदे पर


दुआ मांगू  मैं रब से , मेरा से हो जाऊं हमारा,





✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻


09-07-2021

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