toshi

apne vajood ki talash me.........
Related Posts with Thumbnails

मंगलवार, 16 फ़रवरी 2021

ऋतुराज बसन्त

 




*ऋतुराज बसन्त*




मन्द मन्द बहती बसन्ती बयार,


जैसे कहती हों, कानों में कुछ आज,




बिखर रही चहुँ ओर हरियाली,


पीली सरसों और गेहूँ की बाली,




गूँज रही कोयल की कूक,


चिड़ियों की चहचहाहट मधुर,




लाल-पीले फूलों की बगिया,


भँवरे की गूँजन से गूँजे वादियाँ,




फूले पलाश की नारंगी कलियाँ,


आम की बौर से लदी डालियाँ




प्रिय से मिलने को आतुर मन,


ये है ऋतुराज बसन्त का आगमन,




✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻

 छत्तीसगढ़

15/02/2021

Read more...

बुधवार, 10 फ़रवरी 2021

*किसी मोड़ पर*

 *किसी मोड़ पर*




किसी मोड़ पर कदम जब मेरे लड़खड़ा जाएं,


साथी बन तुम साथ मेरे आ जाना,




किसी मोड़ पर मेरा आत्मविश्वास कमज़ोर पड़ जाए,


हौसला बन तुम मेरा आत्मविश्वास बन जाना,




किसी मोड़ पर जब मैं गलत राह पर बढ़ जाऊँ,


सारथी बन तुम मुझे राह दिखाना,





किसी मोड़ पर जब मैं अपनी जिम्मेदारी भूल जाऊँ,


मार्गदर्शक बन तुम मुझे, मेरी जिम्मेदारी याद दिलाना,




किसी मोड़ पर जब मैं अहम में पड़ जाऊँ,


वहम तोड़ तुम मेरा आईना बन जाना, 




किसी मोड़ पर जब मैं स्वार्थी बन जाऊँ,


कर निबाह तुम अपनी जिम्मेदारियों का मुझे एहसास कराना,




किसी मोड़ पर कदम जब मेरे लड़खड़ा जाएं,


साथी बन तुम साथ मेरे आ जाना,



✍️तोषी गुप्ता✍️

10/02/2021

Read more...

मंगलवार, 9 फ़रवरी 2021

जीने का अंदाज़ कुछ यूँ भी,,,

 *जीने का अंदाज़ कुछ यूँ भी*




ज़िन्दगी जीने अंदाज़ कुछ यूँ रखो,


कोई कदम पीछे भी खीँचे तो मंज़िल दूर ना हो,




अपने लक्ष्य पर ध्यान कुछ इस तरह रखो कि,


राह में रोड़े कोई लाख लगाए, लक्ष्य से तुम कभी ना भटको,




रिश्ते पूरी शिद्दत से कुछ इस तरह निभाओ कि,


कोई गलतफहमी रिश्तों को तोड़ ना पाए,




लोगों में खुशियां कुछ इस तरह बांटों कि,


कोई न तुमसे नाराज़ रहने पाए,




अपनी बात लोगों के सामने कुछ इस तरह रखो,


कोई तुमसे विमुख होने ना पाए,




दोस्तों से दोस्ती कुछ इस तरह निभाओ,


हो जाए कभी अनबन तो भी दोस्ती ना टूटने पाये,




ज़िन्दगी जीने का अंदाज़ कुछ यूँ रखो,


ज़िन्दगी का हर एक पल फिर से जी जाने को जी करे,






✍️तोषी गुप्ता✍️

06 फरवरी 2021

Read more...

*संगठन में शक्ति होती है,*

 *संगठन में शक्ति होती है,* 

और संगठन की इस शक्ति को हम प्रकृति के द्वारा बेहतर समझ सकते हैं। जैसे चींटियाँ , हमेशा समूह में रहकर कार्य करती हैं, और समूह में ये असंभव कार्य भी कर लेती हैं, जैसे अपने से कई गुना भारी और बड़े भोजन को अपने गंतव्य तक ले जाना। इसी तरह मधुमख्खियाँ, जो समूह में कार्य कर कुछ ही मिनटों में अपने लिए छत्ता तैयार कर लेते हैं और समूह में कार्य कर ही इतनी अधिक मात्रा में शहद इकट्ठा कर लेती हैं। शहद एकत्रित करने वालों को भी इसी संगठन की शक्ति से अपने छत्तों से दूर रखती हैं। 1-2 नहीं सभी मधुमख्खियाँ संगठित होकर शहद एकत्रितकर्ता पर टूट पड़ती हैं। इसी तरह पेड़ों का ढेरों समूह जीवनदायिनी वर्षा का कारण बनता है। संयुक्त परिवार भी इसके उदाहरण हैं जो एकल परिवार से हमेशा अधिक सुरक्षित और सुखी माने जाते हैं। ये अन्तरा परिवार भी इसका उदाहरण है , जिसमें अब हम सब संगठित होकर साहित्य की ख़ुशबू देश के कोने कोने तक बिखेर रहे हैं। ऐसे कितने ही उदाहरण मिल जाएंगे , सीमा पर मुस्तैदी से डटे हुए हमारे सैनिक जो संगठित होकर साथ रहते हैं और दुश्मन से हर पल हमारी रक्षा करते हैं। ये सब संगठन से ही संभव है। इन सब के कारण ही कहा गया है

*संगठन में शक्ति होती है*


Read more...

संस्कार



 *बुनियाद*


*संस्कार*


शान्तनु टेबल पर सर झुकाए अपने फाइलों में व्यस्त था। तभी 2 व्यक्ति टेबल के सामने रखी चेयर में आकर बैठते हुए बोले, कैसे हैं शान्तनु बाबू। हमारे काम का कुछ हुआ। शान्तनु ने सर उठा कर देखा, दोनों व्यक्तियों ने एक फाइल और एक पैकेट शान्तनु की तरफ बढ़ाते हुए कहा, अब मान भी जाइये शान्तनु जी, इन फाइलों में सिग्नेचर कर दीजिए।कब तक ईमानदारी की राह में चलते हुए आप अपनी तरक्की रोकेंगे। आप भी तरक्की कीजिये और हमें भी तरक्की का मौका दीजिये। सहसा शान्तनु की आंखों के सामने उसके परिवार की सारी ज़रूरतों का दृश्य घूम गया। बाबूजी का मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराना था, माँ के घुटने का ऑपरेशन अब ज़रूरी हो गया था। बेटी का एक बड़े इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला करवाना था, और बेटे की स्कूल की फ़ीस भरनी थी, अब उनकी और स्वाति की तबियत भी तो खराब रहने लगी थी। फिर 2 साल ही तो बचे हैं उनके रिटायरमेंट को। मन तो हो रहा था, तुरंत पैकेट उठा कर रख ले, और फाइलों में सिग्नेचर कर दे। लेकिन शान्तनु ने हाथ जोड़कर विनम्रता से उन्हें मना कर दिया। शान्तनु अब उन्हें वापस जाते हुए देख रहा था, और सोच रहा था आज बाबूजी के बुनियादी संस्कारों की वजह से ही मैं ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन कर पा रहा हूँ। और साथ ही उसने एक कंपनी में पार्ट टाइम जॉब के लिए आवेदन भेज दिया और स्वयं से बातें करने लगा कि, आय तो बढ़ानी पड़ेगी लेकिन अपनी आय बढ़ाने के लिए वो ग़लत रास्ता कभी नहीं अपनाएगा।

09/02/2021


Read more...

बुधवार, 3 फ़रवरी 2021

तुम हो तो मैं हूँ,,,,

 *तुम हो तो मैं हूँ*




तुम हो तो मैं हूँ,


तुमसे ही शुरू,


तुमसे ही ख़त्म हूँ मैं,





जीवन के इस वाद्यवृन्द में,


तुम्हारे हर साज की 


आवाज़ हूँ मैं,





घनी दरख्त के समान तुम, 


और तुम्हारी मजबूत शाखाओं से


निकली लताएं हूँ मैं,





तुमसे ही पहचान मेरी,


जीवन की डोर तुमसे बंधी,


तुम्हारे जीवन के साँसों की आवाज़ हूँ मैं,





तुमसे मैं, 


मुझसे , मेरा ये जीवन,


मेरे वज़ूद की पहचान हो तुम,





शून्य से शुरू,


ज़िन्दगी के सफ़र में,


मेरी चाहतों की मंज़िल हो तुम,






हाँ, 


तुम हो तो मैं हूँ,,,,


हाँ, तुमसे ही तो मैं हूँ,,,,



✍️तोषी गुप्ता✍️

03/02/2021

Read more...

मंगलवार, 2 फ़रवरी 2021

चंदन

 *चंदन*




बहुत तक़लीफ़देह होता है,


वजूद का चंदन हो जाना,


ज़हरीले साँपों का आस्तीन में छिप जाना,




इर्द गिर्द लिपटे सैकड़ों साँपों के बीच,


उनकी कड़ी होती गिरफ़्त से 


अपनी खुशबू बिखेर पहचान आ पाना, 




लोगों के मस्तक पर स्थान पाने,


अपने वज़ूद को धीरे- धीरे खत्म करना,




वहीं मानव तन से मुक्ति पर,


उनकी चिता बन स्वयं ख़ाक हो जाना,




लेकिन चंदन बन तब वज़ूद महक-महक जाता है,


जब यह प्रभु के मस्तक और चरणों में जगह पाता है!!


✍️तोषी गुप्ता✍️

01 फरवरी 2021

Read more...

  © Blogger templates The Professional Template by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP