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मंगलवार, 1 जून 2021

आंकलन

 आंकलन





परीक्षा की नीयत तारीख पास आते जा रही थी। इधर मुकुल और शिवम दोनों ही अपनी परीक्षा की तैयारी में जोर शोर से लगे हुए थे। मुकुल और शिवम बचपन से ही मेधावी छात्र रहे हैं हमेशा दोनों एक दूसरे से कुछ ही नंबरों से आगे - पीछे होते लेकिन पिछले 3 वर्षों से मुकुल परीक्षा में शिवम से अधिक नंबर लेकर आता और अव्वल रहता। शिवम कुछ नंबरों से मुकुल से पीछे रह जाता। यही वजह थी कि इस वर्ष बोर्ड परीक्षा में भी मुकुल निश्चिंत था कि वो ही अव्वल आएगा। और इसी अतिआत्मविश्वास और आंकलन के साथ मुकुल पढ़ाई के प्रति थोड़ा लापरवाह भी हो गया था। जबकि शिवम अपनी पूरी लगन और निष्ठा से अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया हुआ था। दोनों ने अच्छी तरह परीक्षा दी। आज परिणाम का दिन था। और शिवम ने पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। वहीं अपनी अतिआत्मविश्वास और गलत आंकलन के कारण मुकुल ने प्रदेश में नौवाँ स्थान प्राप्त किया था। परिणाम के साथ ही मुकुल सोच रहा था कि काश वो अपनी योग्यता का आंकलन नहीं कर सिर्फ परीक्षा की तैयारी पर अपना ध्यान केन्द्रित किया होता, तो उसके परीक्षा परिणाम और बेहतर हो सकते थे। 





✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻


01-06-2021

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रविवार, 30 मई 2021

ख्वाबों की दुनिया






ख़्वाबों की दुनिया





ज़िन्दगी में ज़िन्दगी से जुड़ी


लेकिन हक़ीक़त से दूर


एक दुनिया है ख्वाबों की


जहाँ पूरे होते सपने हमारे


खुशी के दो पल,सुकून के दो पल,


जहाँ होते एक-एक पल अनमोल,


स्वयं के बेहद करीब,


जहाँ उड़ते कल्पनाओं के घोड़े,


पँखों को फैलाते, आसमान में,


घूमते, अठखेलियाँ करते,


गुदगुदाते बादलों के बीच,


अपने ख़्वाबों को दूर क्षितिज तक ले जाते,


बादलों के नर्म बिछौने में,


ख्वाबों का खूबसूरत घरौंदा बनाते,


नींद में मस्त, अपने सपनों के पर फैलाते,


ख़्वाबों की एक नई दुनिया बसाते,





✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻


29/05/2021

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बुधवार, 26 मई 2021

*तो क्या कहेंगे आप*

 *तो क्या कहेंगे आप*


  


खूबसूरती भी दो तरह की,


एक देह की, एक मन की,


हो खूबसूरत देह, 


पर मन में हो खोट 


तो क्या कहेंगे आप,,, 





सीरत भी दो तरह की,


एक सबके सामने, एक भीतर,


सबके सामने हो आदर्श,


पर भीतर हो जीना दुश्वार,


तो क्या कहेंगे आप,,,,





सिक्के के पहलू भी दो तरह के,


एक चित, एक पट,


जब जीत जाए एक,


पर दूजा चाहे चित भी


 उसकी,पट भी उसकी


तो क्या कहेंगे आप,,,,,





सच भी दो तरह का,


एक अर्ध सच, एक आईना का सच,


अर्ध सच सब मान भी जाये,


पर आँखे न मिला सको आईने में,


तो क्या कहेंगे आप,,,,





रिश्तों का मान भी दो तरह का,


एक ज़रूरत का, एक मतलब का,


मतलब था तो साथ थे,


ज़रूरत में सब गायब है,


तो क्या कहेंगे आप,,,,





नशा भी दो तरह का,


एक बेकार की आदतों का, एक सफलता का,


सफलता हो अपार,


लेकिन बेकार की आदत हो साथ ,


तो क्या कहेंगे आप,,,,





दौलत भी दो तरह की,


एक अर्थ की, एक सुख की,


धन दौलत हो अपार,


पर सुख ना हो साथ,


तो क्या कहेंगे आप,,,,





सुख भी दो तरह का,


एक दौलत का, एक परिवार का,


दौलत का हो साथ अपार,


पर परिवार में हो अनबन हज़ार,


तो क्या कहेंगे आप,,,,





परिवार भी दो तरह का,


एक साथ रहते हुए, एक ज़रूरत में साथ रहते हुए,


साथ तो रहते हैं ,


पर ज़रूरत में साथ ना हों,


तो क्या कहेंगे आप,,,,





✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻


26/05/2021

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व्हाट्सएप्प स्टेटस

 व्हाट्सअप स्टेटस


रोज की भांति शेखर बाबू ने सुबह की चाय और अख़बार के बाद अपने मोबाइल पर व्यस्त हो गए। वो भी अपनी छोटी सी बगिया के कुछ फूलों की तस्वीर अपनी तस्वीर के साथ व्हाट्सअप स्टेटस पर डाल दिये। 



कुछ ही मिनट हुए होंगे कि उनके मॉर्निंग वॉक और इवनिंग वॉक के मित्रों माथुर साहब, शर्मा जी, सविता जी, प्रोफेसर सीमा, रमेश भाई आदि के कमेंट्स आने भी शुरू हो गए। शेखर बाबू ने भी अपने मित्रों के व्हाट्सअप स्टेटस पर कमेंट्स किये। 



इस लॉकडाउन और कोरोना के समय मित्रों से मिलना तो नहीं हो पाता था लेकिन व्हाट्सएप्प स्टेटस के जरिये सभी मित्र आपस में अपनी कुशलता का संदेश साझा किया करते थे। शेखर बाबू मोबाइल में अपने मित्रों के व्हाट्सएप्प स्टेटस में व्यस्त थे तभी बहू रीना ने आवाज़ लगाई,,,,,, 



"पापाजी नाश्ता तैयार है, आइए,,,," 



शेखर बाबू जैसे अपने मोबाइल में ही मगन कुछ ढूंढ रहे थे तभी राहुल भी आ गया और बोला,,,,



 "पापाजी चलिए भी, नाश्ता ठंडा हो रहा है,,," 



शेखर बाबू नाश्ता करने डाइनिंग टेबल पर आ गए। नाश्ता करते करते भी बार - बार वो थोड़े चिंतित से अपना मोबाइल चेक कर रहे थे। 

राहुल ने उनसे पूछा,,,, "क्या हुआ पापाजी, आप कुछ परेशान नज़र आ रहे हैं, कोई बात है क्या,,?" 



शेखर बाबू ने थोड़ा परेशान होते हुए कहा,,,, "नहीं कुछ नहीं, अभी तक श्रीवास्तव जी ने अपना व्हाट्सएप्प स्टेटस नहीं डाला, बस वही देख रहा था।" 



राहुल और रीना शेखर बाबू की इस बात पर हँस पड़े और राहुल ने कहा, हो सकता है कहीं व्यस्त होंगे, तो नहीं डाला व्हाट्सएप्प स्टेटस , इसमें परेशान होने वाली क्या बात है,,,? 



शेखर बाबू चुपचाप नाश्ता करने लगे, लेकिन अभी भी उनके चेहरे पर चिन्ता के भाव थे। असल में सभी मित्रों ने इस लॉक डाउन में अपनी ख़ैरियत बताने के लिए व्हाट्सएप्प स्टेटस को माध्यम बनाया था। सभी मित्र सुबह उठकर निश्चित रूप से कोई न कोई व्हाट्सएप्प स्टेटस डालते। इस तरह सभी मित्रों को एक- दूसरे की ख़ैरियत पता चलते रहती। 



नाश्ता करने के बाद फिर शेखर बाबू अपनी बालकनी में चले गए, पक्षियों के लिए दाना -पानी रखा। कुछ पक्षियों की तस्वीरें ली और व्हाट्सएप्प स्टेटस पर डाला। मोबाइल देखते देखते अब वो एकदम से चिंतित हो गए । 11 बज रहे थे लेकिन श्रीवास्तव जी ने आज ना ही कोई व्हाट्सएप्प स्टेटस डाला ना ही कोई कमेंट्स किया। अब उनसे रहा नहीं गया उन्होंने श्रीवास्तव जी को फोन लगाया , उन्होंने नहीं उठाया, तो शेखर बाबू  जाकर राहुल से बोले,,,,, 



 "राहुल मुझे लगता है कुछ गड़बड़ है, हमें तुरंत श्रीवास्तव जी की खबर लेनी चाहिए।"  और अपने मित्रों के बीच व्हाट्सएप्प स्टेटस के बारे में निश्चित हुई सारी बातें बताई। 



दरअसल श्रीवास्तव जी और उनकी पत्नी उनके घर से कुछ दूर ही रहते थे। बेटा बहू पुणे में तो बेटी दामाद हैदराबाद में सैटल थे। श्रीवास्तव जी और उनकी पत्नी घर में अकेले रहते थे। राहुल को भी अब अपने पापा की बातें सही लग रही थी। राहुल ने तुरंत अपने पड़ोसी विजय को फ़ोन किया और पूरी सुरक्षा के साथ दोनों श्रीवास्तव जी के घर गए। 4-5 बार घंटी बजाने के बाद मिसेज़ श्रीवास्तव  धीरे-धीरे कदमों से दरवाजे तक आई। दूर से ही उन्होंने बताया कि श्रीवास्तव जी को हल्का बुख़ार है और उनकी तबियत भी ठीक नहीं लग रही। बिना देर किए राहुल और विजय ने पास के ही अस्पताल में फोन लगाया और एम्बुलेंस मंगाया। और श्रीवास्तव जी और उनकी पत्नी को अस्पताल भिजवाया। उनके बेटे और बेटी से भी फेसबुक के जरिये संपर्क कर जानकारी दी। 



लगभग 20 दिन अस्पताल में रहने के बाद पूर्ण स्वस्थ होकर श्रीवास्तव जी वापस अपने घर आये। और अगली ही सुबह उन्होंने चाय के कप के साथ अपनी तस्वीर अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर लगाई। शेखर बाबू ने श्रीवास्तव जी का स्टेटस देखा और 👍 का साइन दिया। और फिर अपनी बगिया के फूलों की तस्वीर व्हाट्सएप्प स्टेटस में डाल दी। सभी मित्रों के व्हाट्सएप स्टेटस और कमेंट्स देखकर अब शेखर बाबू और श्रीवास्तव जी दोनों बहुत खुश थे।




✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻


25/05/2021

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मंगलवार, 25 मई 2021

अनमोल धरोहर

 *अनमोल धरोहर*




परंपराएँ भी कुछ इस तरह साथ लेकर चलिए,


आने वाली पीढ़ी को भी साथ लेकर चलिए,




हम निभाएंगे, तभी तो सीखा पाएंगे,


ये वो फ़ल है , जिसके वृक्ष हम लगाएंगे,




बुजुर्गों के दिखाए राह पर चलकर,एक नई राह बनाएंगे,


देकर ये धरोहर वंशजों को,इसका महत्व समझाएंगे,




है अनमोल विरासत में मिली ये रीति रिवाज़,


इस अनमोल परंपराओं को अनमोल धरोहर के रूप में सजायेंगे,





✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻


24-05-2021

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शनिवार, 22 मई 2021

सपनों के पँख

 



सपनों के पँख




अपने सपनों के पंख फैलाकर,


उन्मुक्त गगन में उड़ जाऊं,


बुनकर अपने सपनों को,


एक नया आयाम दे जाऊं,





मन कि आँखों से ,


एक नया संसार बनाऊं,


जहाँ हों खुशियाँ ही खुशियाँ


ऐसी दुनिया में बस जाऊँ,





रखूं हौसला, मुश्किल पथ पर,


नाकामी से ना घबराऊँ,


जीत का सबब ले मन में,


हर मुश्किल से जीत जाऊँ,





आसमाँ छूने का अरमान ले

 दिल में,


अपने पँख फैला जाऊँ,


ख़्वाबों की मोती पिरोकर,


सुन्दर माला सजा जाऊँ,





हो कितनी भी ऊँची मंज़िल,


हासिल करने मचल जाऊँ,


अपनी काबिलियत के दम पर,


उस मंज़िल पर पहुँच जाऊँ,





✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻


21-05-2021

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शुक्रवार, 21 मई 2021

शारीरिक और मानसिक रोगों के लिए उत्प्रेरक है- नकारात्मक सोच

 *शारीरिक और मानसिक रोगों के लिए उत्प्रेरक है- नकारात्मक सोच*





हमारे ब्रेन की एक एक कोशिका कई हज़ार कोशिकाओं से जुड़ी होती है। जिससे हमारे दिमाग में कोई भी विचार आये वो अन्य कई हज़ार कोशिकाओं को प्रभावित करती है। जिस तरह एक सकारात्मक सोच से हमारे ब्रेन की कोशिकाओं में लाभदायक रसायनों का भी उत्सर्जन और स्त्राव होता है, जो कई हज़ार कोशिकाओं में उस सकारात्मक और लाभदायक रसायन का संचार करता है उसी तरह एक नकारात्मक सोच से हमारे ब्रेन की कोशिकाओं में हानिकारक रसायनों का भी स्त्राव होता है जो कई हज़ार कोशिकाओं तक उस नकारात्मक और हानिकारक रसायनों का संचार करता है। जिससे इंसान ना केवल शारीरिक अपितु मानसिक रोगों का शिकार भी हो सकता है। वहीं एक सकारात्मक सोच से इंसान शारीरिक और मानसिक रोगों से निजात भी पा सकता है जो कि सिर्फ उसके आत्मबल और सकारात्मक सोच से ही संभव है।




✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻


20-05-2021

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