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बुधवार, 19 मई 2021

प्यार का सागर

 प्यार का सागर 




ममता ना कहलाई


ये वो अहसास है,


हर पिता के दिल की,


बस यही तो पहचान है,





छुपा कर अपने अंदर,


प्यार का अथाह सागर,


मौन ही दर्शा देते पिता,


इतना कुछ अंदर रखकर,





व्यवहार में सख़्ती,


दिल में नरमी,


आवाज़ में तीखापन,


लेकिन वो कोमल मन,





एक पिता ही है,


जो रखे ह्रदय विशाल,


जितनी भी हो तकलीफ,


माथे पर बल ना निशान,





दुनिया चाहे कहे आपको,


आप बड़े सख़्त हैं,


मन ये कहता है ,


आप प्यार का सागर हैं,





✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻


19-05-2021


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महत्व

 महत्व


अक्सर रीना रघु और मिनी को घर के छोटे छोटे काम करने को कहती। जब मिनी घर के कामों में रीना का हाथ बंटाती तब तो रीना की सास कुछ ना कहती लेकिन जैसे ही रघु को किसी काम के लिए कहा जाता रीना की सास नाराज़ होकर रघु को काम से बचाने का प्रयास करती। लेकिन रघु समझता था और रीना के बोलने से ना केवल अपने छोटे छोटे काम खुद करता बल्कि घर के कामों में भी रीना की मदद करता। देखते ही देखते दोनों बच्चे बड़े हो रहे थे और अब बाहर की दुनिया में कदम रख रहे थे। मिनी और रघु अब घर से दूर रहकर जॉब कर रहे थे इसी बीच लॉकडाउन लग गया। दोनों ने घर वापस आने की कोशिश की लेकिन घर वापस ना आ सके। इधर रीना की सास चिंतित थी कि दोनों बच्चे कैसे करेंगे, लेकिन रीना निश्चिंत थी। फोन पर बात होने और वीडियो कॉलिंग में जब मिनी और रघु हँसते-हँसते नए-नए डिशेज़ बनाते खुशी - खुशी घर का काम करते दिखते तो अब धीरे-धीरे रीना की सास भी निश्चिंत होती गई, आख़िर उसे भी समझ आ गया था कि लड़कों के भी घर के कामों में हाथ बंटाना उतना ही महत्वपूर्ण है , जितना कि लड़कियों का। 




✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻


18-05-2021

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वो मस्ती भरी दोपहरी,,,

 वो मस्ती भरी दोपहरी



नीम की छाँव तले वो ठंडी दोपहरी,


दोस्तों के साथ , हमारी मस्ती भरी टोली,


वो पूरी दोपहर यूँ ही गुज़ार देना,


कभी बेर तोड़ लाना, 


तो कभी बेल को तोड़ कर खाना,


पेड़ों की छाँव तले ,


अपना एक छोटा सा घर बनाना,


कुछ लकड़ियों के सहारे घेरे बनाना,


फिर मम्मी की साड़ी ले ,


उसकी दीवारें बनाना,


अपना आशियाना फूल पत्तों से सजाना,


छोटा सा चूल्हा बना ,


मिट्टी के बर्तन में खाना पकाना,


फिर सब दोस्तों संग उस दाने दाने को ,


चटखारे लेकर खाना,


बस यूँ ही गुजर जाती थी दोपहर,


दोस्तों संग घर- घर खेल कर,


बहुत याद आते हैं वो बीते हुए पल,


वो मस्ती भरी दोपहरी


और नीम की छाँव तले ठंडी दोपहरी,





✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻


17-05-2021

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तमस घनेरा छँट जाएगा

 तमस घनेरा छँट जायेगा


विपदा की घड़ी आन पड़ी जब,


मत होना तुम विचलित,


धरना धीरज, रखना खुद पर विश्वास,


थाम कर अपनों का हाथ,


अपनों का साथ और प्यार,


वक़्त है, गुज़र जाएगा,


तमस घनेरा छँट जाएगा,


सुख का सूरज फिर उदित हो,


अपना प्रकाश फैला जाएगा,


हंसी ये संसार होगा,


अपनों का साथ होगा,


वक़्त है गुज़र जाएगा,


तमस घनेरा छँट जाएगा,






✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻


12-05-2021

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सोमवार, 10 मई 2021

"बेटी बनी अब माँ"

 



बेटी बनी अब माँ...




इंतज़ार अब थम ना रहा था,


कैसे हो नौ महीने पूरे,


इस सोच में एक-एक पल,


इंतज़ार बढ़ता ही जा रहा ,


इंतज़ार भी ख़त्म हुआ,


और गोद में एक नन्हीं कली आई,


अब मुस्काती हुई, नाज़ुक सी परी आई,


रोम-रोम खिल उठा,जब अपनी परछाई,


अपने हाथों में पाई,


अब दिन रात होता उसका साथ,


उसे नहलाते, उसका श्रृंगार करते, 


छोटी सी फ्रॉक पहने, 


छम छम उसके पैरों की आवाज़ सुनते,


हंसती , खिलखिलाती, 


पूरे घर में उसकी आवाज़ गूंजती,


अब धीरे-धीरे बड़ी हो रही है,


मेरा भी अब ख्याल रखने लगी है,


माँ साथ खाना खाएंगे बोल


 सखी बन जाया करती है,


कभी मेरी कुर्तियां, कभी मेरी चुनरी ,


तो कभी मेरी साड़ी लपेट, शरमाया करती है,


कभी मेरे बालों को सहलाते हुए,


 मेरे बाल भी बनाया करती है,


अब तो मेरे कपड़े भी खुद पसंद करती,


और कभी मेरा श्रृंगार किया करती है,


किचन में मेरे साथ खुद आकर,


 हाथ बंटाया करती है,


तो कभी मेरे लिए, 


अपने हाथों से चाय बना लाती है,


साथ बैठकर घंटों गप्पे लड़ाती,


मेरी गलतियों पर अब ,


मुझे डांटा भी करती है,


हाँ मेरी बेटी, मेरी माँ बन,


 मेरे साथ समय बिताया करती है,,,



✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻


10/05/2021

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शनिवार, 8 मई 2021

हर एक दोस्त ज़रूरी होता है

 *हर एक दोस्त ज़रूरी होता है*


दोस्ती नाम है विश्वास का, और निश्छल प्रेम का, भगवान ने जब हमें जन्म दिया तो सब कुछ निश्चित था , हमारे माता -पिता , भाई- बहन, रिश्तेदार,,,, सब कुछ। एक दोस्त , सखा, मित्र ही था जिसने हमें अपने मन से खुद चुना। और दो लोगों के बीच दोस्ती का रिश्ता तभी बनता है, जब उनके बीच वैचारिक समानता होती है। अल्प समय के लिए मतभेद ज़रूर हो सकते हैं लेकिन दीर्घकालिक देखा जाए तो दोनों के बीच विचारों की समानता पाई जाती है। दोस्ती में धर्म , जात - पांत, अमीर- गरीब का भेद नहीं होता। जहां दिल मिल जाये, विचार मिल जाये, दोस्ती हो जाती है। ऐसे में "हर एक दोस्त ज़रूरी होता है", क्योंकि हर एक दोस्त में अपनी एक अलग विशेषता, और अलग गुण होते हैं, और दोस्त तो वो होते हैं जो मुसीबत में सबसे आगे खड़े होते हैं। दोस्त की परेशानी, सुख- दुख, खुशी- गम, सब बाँट लेते हैं। इसलिए कहा जाता है,हर एक दोस्त ज़रूरी होता है।

                 

                दोस्ती सिर्फ 2 अनजान लोगों के बीच नहीं होती , बल्कि माँ - बेटी, पिता- पुत्र, भाई- बहन, किसी के भी बीच हो सकती है, और ना ही ये उम्र की मोहताज है तभी तो दादा-दादी और नाना-नानी, पोते-पोतियों के अभिन्न मित्र बन जाते हैं। तब रिश्ता पहले से भी कहीं और मजबूत हो जाता है। 


               निश्छल प्रेम के इस मजबूत धागे में कोई बड़ा -छोटा नहीं होता, बल्कि दोनों एक दूसरे के पूरक होते हैं। जिसे बहुत खूबसूरती और समझदारी से निभाना होता है। चाहे दोस्ती का कोई भी रूप हो बस विश्वास की डोर मजबूत होनी चाहिए। इसलिए तो दोस्ती की मिसाल दी जाती है।



✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻


07/05/2021


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बुधवार, 5 मई 2021

बोनसाई

 बोनसाई



"अरे ! अभी नीतू की उम्र ही क्या है? अभी-अभी तो दुल्हन बनकर आई थी इस घर में , महज़ डेढ़ साल ही तो हुए हैं उसे इस घर में आये, अब नीतू और नवीन का साथ यहीं तक का था तो इसमें नीतू का क्या दोष?" विभा ने लगभग चिल्लाते हुए अपनी बेटी प्रीति से कहा,


 पर माँ,,,, लोग क्या कहेंगे? प्रीति  ने भी माँ को समझाने की कोशिश की। 


"लोगों की परवाह मैं नहीं करती लेकिन नीतू ऑफिस भी जाएगी और हर वो काम कर सकती है जो वो करना चाहे, जैसा रहना चाहे रह सकती है," विभा ने जैसे ठान रखी थी कि किसी भी कीमत पर वो नीतू का साथ नहीं छोड़ेगी।


 प्रीति अब अपने पापा विकास से बोली, "पापा अब आप ही समझाइये न माँ को, अब तो नवीन भैया भी नहीं रहे,बाहर कहीं कुछ ऊँच नीच हो गई तो...


 "बस!!!! अब हमें और कुछ नहीं सुनना... मैंने और विभा ने फैसला कर लिया है, हम नीतू को घर में बोनसाई की तरह नहीं रखेंगे, बल्कि हम उसकी पत्तियों शाखों को पल्लवित और मजबूत होते देखना चाहते हैं। अब हमारी एक नहीं दो बेटियाँ हैं, प्रीति और नीतू, और वह जब तक इस घर में है अपनी मर्जी से जी सकती है।" विकास ने विभा की ओर मुस्कुराते हुए देखकर कहा ...और अब तो हमें एक और कन्यादान की तैयारी भी करनी है,क्यों विभा? 


दोनों  की आंखों से खुशी के आँसू बह रहे थे। परदे की ओट में खड़ी नीतू अपनी कोरों के आँसू पोछते हुए पास ही रखे बोनसाई को बाहर ले जाकर ज़मीन में उसकी जड़ों को जमा दिया।




✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻 


04/05/2021

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