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apne vajood ki talash me.........
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मंगलवार, 9 फ़रवरी 2021

संस्कार



 *बुनियाद*


*संस्कार*


शान्तनु टेबल पर सर झुकाए अपने फाइलों में व्यस्त था। तभी 2 व्यक्ति टेबल के सामने रखी चेयर में आकर बैठते हुए बोले, कैसे हैं शान्तनु बाबू। हमारे काम का कुछ हुआ। शान्तनु ने सर उठा कर देखा, दोनों व्यक्तियों ने एक फाइल और एक पैकेट शान्तनु की तरफ बढ़ाते हुए कहा, अब मान भी जाइये शान्तनु जी, इन फाइलों में सिग्नेचर कर दीजिए।कब तक ईमानदारी की राह में चलते हुए आप अपनी तरक्की रोकेंगे। आप भी तरक्की कीजिये और हमें भी तरक्की का मौका दीजिये। सहसा शान्तनु की आंखों के सामने उसके परिवार की सारी ज़रूरतों का दृश्य घूम गया। बाबूजी का मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराना था, माँ के घुटने का ऑपरेशन अब ज़रूरी हो गया था। बेटी का एक बड़े इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला करवाना था, और बेटे की स्कूल की फ़ीस भरनी थी, अब उनकी और स्वाति की तबियत भी तो खराब रहने लगी थी। फिर 2 साल ही तो बचे हैं उनके रिटायरमेंट को। मन तो हो रहा था, तुरंत पैकेट उठा कर रख ले, और फाइलों में सिग्नेचर कर दे। लेकिन शान्तनु ने हाथ जोड़कर विनम्रता से उन्हें मना कर दिया। शान्तनु अब उन्हें वापस जाते हुए देख रहा था, और सोच रहा था आज बाबूजी के बुनियादी संस्कारों की वजह से ही मैं ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन कर पा रहा हूँ। और साथ ही उसने एक कंपनी में पार्ट टाइम जॉब के लिए आवेदन भेज दिया और स्वयं से बातें करने लगा कि, आय तो बढ़ानी पड़ेगी लेकिन अपनी आय बढ़ाने के लिए वो ग़लत रास्ता कभी नहीं अपनाएगा।

09/02/2021


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बुधवार, 3 फ़रवरी 2021

तुम हो तो मैं हूँ,,,,

 *तुम हो तो मैं हूँ*




तुम हो तो मैं हूँ,


तुमसे ही शुरू,


तुमसे ही ख़त्म हूँ मैं,





जीवन के इस वाद्यवृन्द में,


तुम्हारे हर साज की 


आवाज़ हूँ मैं,





घनी दरख्त के समान तुम, 


और तुम्हारी मजबूत शाखाओं से


निकली लताएं हूँ मैं,





तुमसे ही पहचान मेरी,


जीवन की डोर तुमसे बंधी,


तुम्हारे जीवन के साँसों की आवाज़ हूँ मैं,





तुमसे मैं, 


मुझसे , मेरा ये जीवन,


मेरे वज़ूद की पहचान हो तुम,





शून्य से शुरू,


ज़िन्दगी के सफ़र में,


मेरी चाहतों की मंज़िल हो तुम,






हाँ, 


तुम हो तो मैं हूँ,,,,


हाँ, तुमसे ही तो मैं हूँ,,,,



✍️तोषी गुप्ता✍️

03/02/2021

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मंगलवार, 2 फ़रवरी 2021

चंदन

 *चंदन*




बहुत तक़लीफ़देह होता है,


वजूद का चंदन हो जाना,


ज़हरीले साँपों का आस्तीन में छिप जाना,




इर्द गिर्द लिपटे सैकड़ों साँपों के बीच,


उनकी कड़ी होती गिरफ़्त से 


अपनी खुशबू बिखेर पहचान आ पाना, 




लोगों के मस्तक पर स्थान पाने,


अपने वज़ूद को धीरे- धीरे खत्म करना,




वहीं मानव तन से मुक्ति पर,


उनकी चिता बन स्वयं ख़ाक हो जाना,




लेकिन चंदन बन तब वज़ूद महक-महक जाता है,


जब यह प्रभु के मस्तक और चरणों में जगह पाता है!!


✍️तोषी गुप्ता✍️

01 फरवरी 2021

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बुधवार, 20 जनवरी 2021

कुछ तो लोग कहेंगे

 *कुछ तो लोग कहेंगे*


लोगों का काम है कहना

देख के तुमको, असफल होते,

नाकाम होते फिर आगे बढ़ते,

कुछ तो लोग कहेंगे



लोगों का का काम है कहना, 

देख के तुमको , कोशिश करते,

गिरते, फिर, गिर कर उठते, 

कुछ तो लोग कहेंगे,



लोगों का काम है कहना,

देख के तुमको, आगे बढ़ते, 

मुश्किल राहों को आसान करते

कुछ तो लोग कहेंगे,



लोगों का काम है कहना,

देख के तुमको, मंज़िल पाते,

खुश होते और खुशियां बांटते,

कुछ तो लोग कहेंगे,



लोगों का काम है कहना,

देख के तुमको, सफल होते,

लक्ष्य पर पहुंच, काबिल बनते

कुछ तो लोग कहेंगे,



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सोमवार, 18 जनवरी 2021

ओस की बूँदों से रिश्ते

 ओस की बूंदों से नाज़ुक होते हैं ये रिश्ते, 


प्यार ज्यादा बढ़ जाये तो पानी बन बह जाए ये रिश्ते,


तकरार की ताप पर मुरझा जाएं ये रिश्ते


संतुलित प्यार और तकरार से मोती बन चमक जाएं ये रिश्ते

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कुछ लोग

कुछ लोग


अपनी क्षमता बढ़ा न पाते लोग,


दूसरों की टाँग खींच गिराते ये लोग,


नहीं जानते ये खुद कितने नीचे गिर रहे ,


दूसरों की टाँग खींच ,


अपनी तरक्की भी रोक रहे,


एक दूजे के कंधों के सहारे सरल होती राह को, 


खुद ही मुश्किल बना रहे,


ना खुद आगे बढ़ रहे, 


ना औरों को आगे बढ़ने दे रहे,


नज़रंदाज़ कर जाते हैं ये लोग, 


लोगों के इरादों की मजबूत सोच को, 


लोगों की टांग खींच सोचते हैं,


रोक लेंगे, उनके हौसलों की उड़ान को,


पर काट कोई रोक न सका,


किसी पंछी की उड़ान को, 


टांग खींच भी रोक न सका,


किसी की मंज़िल की पहुँच को, 


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शनिवार, 28 जुलाई 2018

सहती है डरती है सिसकती है नारी,
जब प्रताड़ित करती उसे दुनिया सारी,

फिर पहचान कर स्वयं की शक्ति ,
नयी ऊर्जा उसमें संचारित होती,

कुचल कर हर दमन का सर,
अब एक नयी कली प्रस्फुटित होती,

खुले आसमाँ में खुद अपनी तकदीर लिखती,
नयी स्फूर्ति नयी हिम्मत से एक नया इतिहास गढ़ती,

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