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गुरुवार, 1 जुलाई 2021

एक ख़्वाब

एक ख़्वाब



देखा एक ख़्वाब,


जो ले चला मुझे 


सुकून के द्वार,


एक ऐसी दुनिया,


जहाँ ना नफ़रत,


ना झगड़े-फ़साद,


इंसां जहाँ बाँटें,


खुशिया हज़ार,


एक-दूजे का लेकर,


हाथों में हाथ,


जात-पांत को,


रखे दर किनार


प्यार ही प्यार,


बाँटें बेशुमार,


जहाँ न कोई,


अमीर या ग़रीब,


ना कोई छोटा या बड़ा,


बाँटते आपस में सब


सुख हो या दुख अपार


निश्छल प्रेम की,


जहां बहें निर्मल गंगा


जहाँ सब कहें,


दिलवालों की है ये दुनिया,




✍️तोषी गुप्ता✍️


01/07/2021




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रविवार, 27 जून 2021

स्त्री

 स्त्री (1)





क्या होती है स्त्री,


कभी जाना है उसे,


या जानने की 


कोशिश की है कभी,


उसके कोमल 


मन  को जानना


इतना आसान भी तो नहीं


ऊपर से कठोर 


पर भीतर से कोमल


यही तो ख़ास है उसमें


कोमलांगी होते हुए भी


भीतर से मजबूत


ठान ले एक बार जो


पूरा कर दिखाए उसे 


राह में चाहे


मुश्किलें हजार आएं


डटे रहे अपने अडिग पग पर


बात अस्मिता पर जब आये


रौद्र रूप अपना दिखाए


वहीं ममता की छांव में अपने


सारे गमों को भूल जाये



✍️तोषी गुप्ता✍️


27-06-2021




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बारिश का ये मौसम

 बारिश का ये मौसम,,,




बारिश की 


रिमझिम फुहारों ने,


मौसम खुशनुमा बना दिया,


दिल में सोए हुए,


कई अरमानों को,


फिर से जगा दिया,





पानी की शीतल बूंदें,


मन हर्षित कर जाती हैं,


मन के भीतर के 


कई दुखों को,


पानी सा 


बह जाने देती हैं,






उमड़ती घुमड़ती


बदरा जब


अठखेलियाँ करती


बारिश की बूंदों संग


सूने दिल को सुकून देता


मन मयूर सा झूम जाता





चारों ओर फैली


ठंडी मादक बयार


मिट्टी की सौंधी 


खुशबू संग


कानों में मधुर संगीत सुनाती


पायल भी थिरकने को मचलती





बारिश का ये मौसम


ऋतु चक्र 


पूरा कर जाता


बच्चे बड़े 


सभी के मन को


आनंदित कर जाता





✍️तोषी गुप्ता✍️


27-06-2021



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पहचान

 पहचान



आसमान में 


अनगिनत सितारे,


चमकते हैं, 


बिना नाम के,


और बिना पहचान के,


लेकिन उनका वजूद 


अमोल है,


इस खगोल के लिए,





चिराग जलता है


हर एक पल 


हर क्षण


बिना अपने वजूद का 


ख्याल किये


बिना चिराग़ तले,


अंधेरे की परवाह किये,


और बिखेर देता है


रौशनी संग खुशियाँ


चहुँ ओर


उसका वजूद अमोल है


अंधेरे के लिए,,,






बहुत ज़रूरी है 


जीवन में 


एक नाम का होना


उससे भी ज़रूरी है


एक पहचान का होना,


लेकिन


सबसे अधिक ज़रूरी है


उसके व्यक्तित्व का होना


उसका व्यक्तित्व  अमोल है


उसकी पहचान के लिए





कर्म पथ पर 


बढ़े चल


बिना फल की चिंता किये


कर्म तुझे 


स्वतः पहचान दिलाएगा


प्रगति सोपान पर


तू विजय पताका फहराएगा


तेरा कर्म अमोल है


तेरी सफलता के लिए





✍️तोषी गुप्ता✍️


26-06-2021

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मौन की आवाज़


 

*मौन की आवाज़*




दबा दी जाती है,


हर उठने वाली आवाज़,


दिल में ही रह जाती है,


कुछ ना 


सुन सकने वाली आवाज़,


अंदर ही अंदर 


घुटने लगती वो चीत्कार,


धीरे धीरे आर्तनाद तब 


अंतर्नाद में बदल जाती,


दब सी जाती 


सिसकियों के बीच,


फिर धीरे-धीरे 


खामोश हो जाती,


तब 


और भी ज्यादा चुभती ,


वो मौन की आवाज़,,,





✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻


26-06-2021


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बुधवार, 23 जून 2021

दिल ही तो है

 दिल ही तो है,



आँखों का हाल भी जो पढ़ ले,


बिना बोले जो भावनाओं को सुन ले,


टूटे दिलों के तारों को जो मिला दे,


एक दिल ही तो है,जो मौन की भाषा समझ ले,





हो कटुता ग़र मन में,उसे भी दर्शा जाता है,


लेक़िन ग़र हो प्रेम का सागर,

उसमें गोते लगाता है,


बैर का भरम तोड़ जो दिल को सुकून पहुंचाता है,


एक दिल ही तो है,जो सब भूल फ़िर आस कर जाता है,





तोड़ दे कोई विश्वास तो,फ़िर संशित हो जाता है,


हो कोई विश्वासपात्र फ़िर भी,उस पर शंका कर जाता है,


ग़र बोल दे कभी मीठे दो बोल कोई,


एक दिल ही तो है, जो फिर विश्वास कर जाता है,





हो ग़र कोई कशमकश मन में,


उलझे हों रिश्तों के तार जीवन में,


सूझे ना जब कोई हल मुश्किल में,


एक दिल ही तो है, जो हर उलझन सुलझा जाता है,





✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻


23-06-2021

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गुरुवार, 17 जून 2021

बच्चों को योग का महत्व कैसे समझाएँ?

 बच्चों को योग का महत्व कैसे समझाएँ?


                             योग का हमारे जीवन में बहुत महत्व है । और यदि इसे अपने दैनिक जीवन में उतार लिया जाए तो यह सोने पर सोहागा वाली बात हो जाती है। और यदि एक बार यह आदत बच्चों के दैनिक जीवन में उतर जाए तो बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में सकारात्मक प्रभाव देखने के लिए मिलते हैं। 


                            हम दोनों , पति के साथ मैं भी कामकाजी महिला हूँ। रात को भोजन के बाद थोड़ा टहलने के अलावा समय कम मिल पाता था। लेकिन इस लॉकडाउन में हमने खाली समय का सदुपयोग करने की सोची। वर्क फ्रॉम होम के चलते हमें समय भी मिल जाय करता था। हम दोनों और दोनों बच्चे मेरी बेटी और बेटा, हम चारों ने शाम को योग और व्यायाम करना शुरू किया और हमने इस दिनचर्या को पिछले 15 माह से इसे सतत रखा है। हमने बच्चों को योग करने के लिए जोर नहीं डाला बल्कि दोनों बच्चे हमें योग करते देख प्रेरित होकर स्वयं उत्साहित होकर योग करने लगे। उनमें रुचि देखते हुए हमने उनके लिए योग प्रशिक्षक भी नियुक्त कर दिया जो थोड़ी स्थिति ठीक होने पर ऑफलाइन और लॉकडाउन के समय ऑनलाइन बच्चों को योग की शिक्षा देने लगे। योग प्रशिक्षक अब उन्हें विशिष्ट योगासन और उनके फायदे भी बताते हैं। बच्चे अब विशिष्ट योगासन लगाकर स्वयं बहुत खुश होते हैं और नित नए योगासन लगाते हैं।अब योग और प्राणायाम उनकी दिनचर्या में शामिल हो गया है।


                               बच्चों को योग जबरदस्ती ना करा के खेल खेल में थोड़ा थोड़ा योग करा के योग के प्रति उनकी रुचि जागृत की जा सकती है। और बच्चों में यदि एक बार योग के प्रति रुचि जागृत हो गई तो बच्चे स्वप्रेरणा से योग करने हमेशा उत्साहित रहेंगे।


                                बच्चों को योग का महत्व बोलकर समझाने के बदले हम स्वयं योग कर उनके सामने उदाहरण प्रस्तुत करें, तो धीरे-धीरे योग बच्चों की दिनचर्या में शामिल भी हो जाएगा और कुछ दिनों पश्चात उसके सकारात्मक परिणाम देखकर बच्चे स्वयं योग का महत्व समझ जाएंगे।




✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻

17-06-2021

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