toshi

apne vajood ki talash me.........
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रविवार, 14 फ़रवरी 2010

मै प्रतिदान नहीं,अपने दिए का सम्मान चाहती हूँ

" वेलेंटाइन डे " पर ख़ास....

मै अनुभव करती हूँ ,
"तुमसे चाहना "
"तुम्हे चाहने' से
कितना भिन्न है ...

अच्छा हो ,
अगर तुम भी
अंतर कर सको
"मुझ से चाहने "
और "मुझे चाहने "
के बीच....

मै प्रतिदान नहीं चाहती,
केवल अपने दिए का
सम्मान  चाहती हू....

संकलन 
'युग्म" से.........

10 टिप्पणियाँ:

निर्मला कपिला 14 फ़रवरी 2010 को 4:24 pm  

तुमसे चाहना "
"तुम्हे चाहने' से
कितना भिन्न है ...
लाजवाब अभिव्यक्ति शुभकामनायें

रंजना [रंजू भाटिया] 14 फ़रवरी 2010 को 4:25 pm  

बहुत ही प्रेम और सम्मान भरी इच्छा ..रचना पसंद आई शुक्रिया

Anil Pusadkar 14 फ़रवरी 2010 को 9:56 pm  

अच्छा संकलन है तोषी।बधाई हो।

धर्मेन्द्र सिंह सेंगर 20 फ़रवरी 2010 को 4:01 pm  

बहुत अच्छा मन को छू गयी आपकी रचना

M VERMA 25 फ़रवरी 2010 को 9:57 am  

मै प्रतिदान नहीं चाहती,
केवल अपने दिए का सम्मान चाहती हू....'
खूब्सूरत खयाल और भाव
सुन्दर रचना

Pawan Nishant 27 फ़रवरी 2010 को 1:28 am  

badi pyari baat kahi aapne. meri shubhkanayen.

zeal 21 मार्च 2010 को 2:52 pm  

मै प्रतिदान नहीं चाहती,
केवल अपने दिए का सम्मान चाहती हू....'


I wish men to understand this much only.

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