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रविवार, 30 मई 2021

ख्वाबों की दुनिया






ख़्वाबों की दुनिया





ज़िन्दगी में ज़िन्दगी से जुड़ी


लेकिन हक़ीक़त से दूर


एक दुनिया है ख्वाबों की


जहाँ पूरे होते सपने हमारे


खुशी के दो पल,सुकून के दो पल,


जहाँ होते एक-एक पल अनमोल,


स्वयं के बेहद करीब,


जहाँ उड़ते कल्पनाओं के घोड़े,


पँखों को फैलाते, आसमान में,


घूमते, अठखेलियाँ करते,


गुदगुदाते बादलों के बीच,


अपने ख़्वाबों को दूर क्षितिज तक ले जाते,


बादलों के नर्म बिछौने में,


ख्वाबों का खूबसूरत घरौंदा बनाते,


नींद में मस्त, अपने सपनों के पर फैलाते,


ख़्वाबों की एक नई दुनिया बसाते,





✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻


29/05/2021

बुधवार, 26 मई 2021

*तो क्या कहेंगे आप*

 *तो क्या कहेंगे आप*


  


खूबसूरती भी दो तरह की,


एक देह की, एक मन की,


हो खूबसूरत देह, 


पर मन में हो खोट 


तो क्या कहेंगे आप,,, 





सीरत भी दो तरह की,


एक सबके सामने, एक भीतर,


सबके सामने हो आदर्श,


पर भीतर हो जीना दुश्वार,


तो क्या कहेंगे आप,,,,





सिक्के के पहलू भी दो तरह के,


एक चित, एक पट,


जब जीत जाए एक,


पर दूजा चाहे चित भी


 उसकी,पट भी उसकी


तो क्या कहेंगे आप,,,,,





सच भी दो तरह का,


एक अर्ध सच, एक आईना का सच,


अर्ध सच सब मान भी जाये,


पर आँखे न मिला सको आईने में,


तो क्या कहेंगे आप,,,,





रिश्तों का मान भी दो तरह का,


एक ज़रूरत का, एक मतलब का,


मतलब था तो साथ थे,


ज़रूरत में सब गायब है,


तो क्या कहेंगे आप,,,,





नशा भी दो तरह का,


एक बेकार की आदतों का, एक सफलता का,


सफलता हो अपार,


लेकिन बेकार की आदत हो साथ ,


तो क्या कहेंगे आप,,,,





दौलत भी दो तरह की,


एक अर्थ की, एक सुख की,


धन दौलत हो अपार,


पर सुख ना हो साथ,


तो क्या कहेंगे आप,,,,





सुख भी दो तरह का,


एक दौलत का, एक परिवार का,


दौलत का हो साथ अपार,


पर परिवार में हो अनबन हज़ार,


तो क्या कहेंगे आप,,,,





परिवार भी दो तरह का,


एक साथ रहते हुए, एक ज़रूरत में साथ रहते हुए,


साथ तो रहते हैं ,


पर ज़रूरत में साथ ना हों,


तो क्या कहेंगे आप,,,,





✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻


26/05/2021

व्हाट्सएप्प स्टेटस

 व्हाट्सअप स्टेटस


रोज की भांति शेखर बाबू ने सुबह की चाय और अख़बार के बाद अपने मोबाइल पर व्यस्त हो गए। वो भी अपनी छोटी सी बगिया के कुछ फूलों की तस्वीर अपनी तस्वीर के साथ व्हाट्सअप स्टेटस पर डाल दिये। 



कुछ ही मिनट हुए होंगे कि उनके मॉर्निंग वॉक और इवनिंग वॉक के मित्रों माथुर साहब, शर्मा जी, सविता जी, प्रोफेसर सीमा, रमेश भाई आदि के कमेंट्स आने भी शुरू हो गए। शेखर बाबू ने भी अपने मित्रों के व्हाट्सअप स्टेटस पर कमेंट्स किये। 



इस लॉकडाउन और कोरोना के समय मित्रों से मिलना तो नहीं हो पाता था लेकिन व्हाट्सएप्प स्टेटस के जरिये सभी मित्र आपस में अपनी कुशलता का संदेश साझा किया करते थे। शेखर बाबू मोबाइल में अपने मित्रों के व्हाट्सएप्प स्टेटस में व्यस्त थे तभी बहू रीना ने आवाज़ लगाई,,,,,, 



"पापाजी नाश्ता तैयार है, आइए,,,," 



शेखर बाबू जैसे अपने मोबाइल में ही मगन कुछ ढूंढ रहे थे तभी राहुल भी आ गया और बोला,,,,



 "पापाजी चलिए भी, नाश्ता ठंडा हो रहा है,,," 



शेखर बाबू नाश्ता करने डाइनिंग टेबल पर आ गए। नाश्ता करते करते भी बार - बार वो थोड़े चिंतित से अपना मोबाइल चेक कर रहे थे। 

राहुल ने उनसे पूछा,,,, "क्या हुआ पापाजी, आप कुछ परेशान नज़र आ रहे हैं, कोई बात है क्या,,?" 



शेखर बाबू ने थोड़ा परेशान होते हुए कहा,,,, "नहीं कुछ नहीं, अभी तक श्रीवास्तव जी ने अपना व्हाट्सएप्प स्टेटस नहीं डाला, बस वही देख रहा था।" 



राहुल और रीना शेखर बाबू की इस बात पर हँस पड़े और राहुल ने कहा, हो सकता है कहीं व्यस्त होंगे, तो नहीं डाला व्हाट्सएप्प स्टेटस , इसमें परेशान होने वाली क्या बात है,,,? 



शेखर बाबू चुपचाप नाश्ता करने लगे, लेकिन अभी भी उनके चेहरे पर चिन्ता के भाव थे। असल में सभी मित्रों ने इस लॉक डाउन में अपनी ख़ैरियत बताने के लिए व्हाट्सएप्प स्टेटस को माध्यम बनाया था। सभी मित्र सुबह उठकर निश्चित रूप से कोई न कोई व्हाट्सएप्प स्टेटस डालते। इस तरह सभी मित्रों को एक- दूसरे की ख़ैरियत पता चलते रहती। 



नाश्ता करने के बाद फिर शेखर बाबू अपनी बालकनी में चले गए, पक्षियों के लिए दाना -पानी रखा। कुछ पक्षियों की तस्वीरें ली और व्हाट्सएप्प स्टेटस पर डाला। मोबाइल देखते देखते अब वो एकदम से चिंतित हो गए । 11 बज रहे थे लेकिन श्रीवास्तव जी ने आज ना ही कोई व्हाट्सएप्प स्टेटस डाला ना ही कोई कमेंट्स किया। अब उनसे रहा नहीं गया उन्होंने श्रीवास्तव जी को फोन लगाया , उन्होंने नहीं उठाया, तो शेखर बाबू  जाकर राहुल से बोले,,,,, 



 "राहुल मुझे लगता है कुछ गड़बड़ है, हमें तुरंत श्रीवास्तव जी की खबर लेनी चाहिए।"  और अपने मित्रों के बीच व्हाट्सएप्प स्टेटस के बारे में निश्चित हुई सारी बातें बताई। 



दरअसल श्रीवास्तव जी और उनकी पत्नी उनके घर से कुछ दूर ही रहते थे। बेटा बहू पुणे में तो बेटी दामाद हैदराबाद में सैटल थे। श्रीवास्तव जी और उनकी पत्नी घर में अकेले रहते थे। राहुल को भी अब अपने पापा की बातें सही लग रही थी। राहुल ने तुरंत अपने पड़ोसी विजय को फ़ोन किया और पूरी सुरक्षा के साथ दोनों श्रीवास्तव जी के घर गए। 4-5 बार घंटी बजाने के बाद मिसेज़ श्रीवास्तव  धीरे-धीरे कदमों से दरवाजे तक आई। दूर से ही उन्होंने बताया कि श्रीवास्तव जी को हल्का बुख़ार है और उनकी तबियत भी ठीक नहीं लग रही। बिना देर किए राहुल और विजय ने पास के ही अस्पताल में फोन लगाया और एम्बुलेंस मंगाया। और श्रीवास्तव जी और उनकी पत्नी को अस्पताल भिजवाया। उनके बेटे और बेटी से भी फेसबुक के जरिये संपर्क कर जानकारी दी। 



लगभग 20 दिन अस्पताल में रहने के बाद पूर्ण स्वस्थ होकर श्रीवास्तव जी वापस अपने घर आये। और अगली ही सुबह उन्होंने चाय के कप के साथ अपनी तस्वीर अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर लगाई। शेखर बाबू ने श्रीवास्तव जी का स्टेटस देखा और 👍 का साइन दिया। और फिर अपनी बगिया के फूलों की तस्वीर व्हाट्सएप्प स्टेटस में डाल दी। सभी मित्रों के व्हाट्सएप स्टेटस और कमेंट्स देखकर अब शेखर बाबू और श्रीवास्तव जी दोनों बहुत खुश थे।




✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻


25/05/2021

मंगलवार, 25 मई 2021

अनमोल धरोहर

 *अनमोल धरोहर*




परंपराएँ भी कुछ इस तरह साथ लेकर चलिए,


आने वाली पीढ़ी को भी साथ लेकर चलिए,




हम निभाएंगे, तभी तो सीखा पाएंगे,


ये वो फ़ल है , जिसके वृक्ष हम लगाएंगे,




बुजुर्गों के दिखाए राह पर चलकर,एक नई राह बनाएंगे,


देकर ये धरोहर वंशजों को,इसका महत्व समझाएंगे,




है अनमोल विरासत में मिली ये रीति रिवाज़,


इस अनमोल परंपराओं को अनमोल धरोहर के रूप में सजायेंगे,





✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻


24-05-2021

शनिवार, 22 मई 2021

सपनों के पँख

 



सपनों के पँख




अपने सपनों के पंख फैलाकर,


उन्मुक्त गगन में उड़ जाऊं,


बुनकर अपने सपनों को,


एक नया आयाम दे जाऊं,





मन कि आँखों से ,


एक नया संसार बनाऊं,


जहाँ हों खुशियाँ ही खुशियाँ


ऐसी दुनिया में बस जाऊँ,





रखूं हौसला, मुश्किल पथ पर,


नाकामी से ना घबराऊँ,


जीत का सबब ले मन में,


हर मुश्किल से जीत जाऊँ,





आसमाँ छूने का अरमान ले

 दिल में,


अपने पँख फैला जाऊँ,


ख़्वाबों की मोती पिरोकर,


सुन्दर माला सजा जाऊँ,





हो कितनी भी ऊँची मंज़िल,


हासिल करने मचल जाऊँ,


अपनी काबिलियत के दम पर,


उस मंज़िल पर पहुँच जाऊँ,





✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻


21-05-2021

शुक्रवार, 21 मई 2021

शारीरिक और मानसिक रोगों के लिए उत्प्रेरक है- नकारात्मक सोच

 *शारीरिक और मानसिक रोगों के लिए उत्प्रेरक है- नकारात्मक सोच*





हमारे ब्रेन की एक एक कोशिका कई हज़ार कोशिकाओं से जुड़ी होती है। जिससे हमारे दिमाग में कोई भी विचार आये वो अन्य कई हज़ार कोशिकाओं को प्रभावित करती है। जिस तरह एक सकारात्मक सोच से हमारे ब्रेन की कोशिकाओं में लाभदायक रसायनों का भी उत्सर्जन और स्त्राव होता है, जो कई हज़ार कोशिकाओं में उस सकारात्मक और लाभदायक रसायन का संचार करता है उसी तरह एक नकारात्मक सोच से हमारे ब्रेन की कोशिकाओं में हानिकारक रसायनों का भी स्त्राव होता है जो कई हज़ार कोशिकाओं तक उस नकारात्मक और हानिकारक रसायनों का संचार करता है। जिससे इंसान ना केवल शारीरिक अपितु मानसिक रोगों का शिकार भी हो सकता है। वहीं एक सकारात्मक सोच से इंसान शारीरिक और मानसिक रोगों से निजात भी पा सकता है जो कि सिर्फ उसके आत्मबल और सकारात्मक सोच से ही संभव है।




✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻


20-05-2021

बुधवार, 19 मई 2021

प्यार का सागर

 प्यार का सागर 




ममता ना कहलाई


ये वो अहसास है,


हर पिता के दिल की,


बस यही तो पहचान है,





छुपा कर अपने अंदर,


प्यार का अथाह सागर,


मौन ही दर्शा देते पिता,


इतना कुछ अंदर रखकर,





व्यवहार में सख़्ती,


दिल में नरमी,


आवाज़ में तीखापन,


लेकिन वो कोमल मन,





एक पिता ही है,


जो रखे ह्रदय विशाल,


जितनी भी हो तकलीफ,


माथे पर बल ना निशान,





दुनिया चाहे कहे आपको,


आप बड़े सख़्त हैं,


मन ये कहता है ,


आप प्यार का सागर हैं,





✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻


19-05-2021


महत्व

 महत्व


अक्सर रीना रघु और मिनी को घर के छोटे छोटे काम करने को कहती। जब मिनी घर के कामों में रीना का हाथ बंटाती तब तो रीना की सास कुछ ना कहती लेकिन जैसे ही रघु को किसी काम के लिए कहा जाता रीना की सास नाराज़ होकर रघु को काम से बचाने का प्रयास करती। लेकिन रघु समझता था और रीना के बोलने से ना केवल अपने छोटे छोटे काम खुद करता बल्कि घर के कामों में भी रीना की मदद करता। देखते ही देखते दोनों बच्चे बड़े हो रहे थे और अब बाहर की दुनिया में कदम रख रहे थे। मिनी और रघु अब घर से दूर रहकर जॉब कर रहे थे इसी बीच लॉकडाउन लग गया। दोनों ने घर वापस आने की कोशिश की लेकिन घर वापस ना आ सके। इधर रीना की सास चिंतित थी कि दोनों बच्चे कैसे करेंगे, लेकिन रीना निश्चिंत थी। फोन पर बात होने और वीडियो कॉलिंग में जब मिनी और रघु हँसते-हँसते नए-नए डिशेज़ बनाते खुशी - खुशी घर का काम करते दिखते तो अब धीरे-धीरे रीना की सास भी निश्चिंत होती गई, आख़िर उसे भी समझ आ गया था कि लड़कों के भी घर के कामों में हाथ बंटाना उतना ही महत्वपूर्ण है , जितना कि लड़कियों का। 




✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻


18-05-2021

वो मस्ती भरी दोपहरी,,,

 वो मस्ती भरी दोपहरी



नीम की छाँव तले वो ठंडी दोपहरी,


दोस्तों के साथ , हमारी मस्ती भरी टोली,


वो पूरी दोपहर यूँ ही गुज़ार देना,


कभी बेर तोड़ लाना, 


तो कभी बेल को तोड़ कर खाना,


पेड़ों की छाँव तले ,


अपना एक छोटा सा घर बनाना,


कुछ लकड़ियों के सहारे घेरे बनाना,


फिर मम्मी की साड़ी ले ,


उसकी दीवारें बनाना,


अपना आशियाना फूल पत्तों से सजाना,


छोटा सा चूल्हा बना ,


मिट्टी के बर्तन में खाना पकाना,


फिर सब दोस्तों संग उस दाने दाने को ,


चटखारे लेकर खाना,


बस यूँ ही गुजर जाती थी दोपहर,


दोस्तों संग घर- घर खेल कर,


बहुत याद आते हैं वो बीते हुए पल,


वो मस्ती भरी दोपहरी


और नीम की छाँव तले ठंडी दोपहरी,





✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻


17-05-2021

तमस घनेरा छँट जाएगा

 तमस घनेरा छँट जायेगा


विपदा की घड़ी आन पड़ी जब,


मत होना तुम विचलित,


धरना धीरज, रखना खुद पर विश्वास,


थाम कर अपनों का हाथ,


अपनों का साथ और प्यार,


वक़्त है, गुज़र जाएगा,


तमस घनेरा छँट जाएगा,


सुख का सूरज फिर उदित हो,


अपना प्रकाश फैला जाएगा,


हंसी ये संसार होगा,


अपनों का साथ होगा,


वक़्त है गुज़र जाएगा,


तमस घनेरा छँट जाएगा,






✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻


12-05-2021

सोमवार, 10 मई 2021

"बेटी बनी अब माँ"

 



बेटी बनी अब माँ...




इंतज़ार अब थम ना रहा था,


कैसे हो नौ महीने पूरे,


इस सोच में एक-एक पल,


इंतज़ार बढ़ता ही जा रहा ,


इंतज़ार भी ख़त्म हुआ,


और गोद में एक नन्हीं कली आई,


अब मुस्काती हुई, नाज़ुक सी परी आई,


रोम-रोम खिल उठा,जब अपनी परछाई,


अपने हाथों में पाई,


अब दिन रात होता उसका साथ,


उसे नहलाते, उसका श्रृंगार करते, 


छोटी सी फ्रॉक पहने, 


छम छम उसके पैरों की आवाज़ सुनते,


हंसती , खिलखिलाती, 


पूरे घर में उसकी आवाज़ गूंजती,


अब धीरे-धीरे बड़ी हो रही है,


मेरा भी अब ख्याल रखने लगी है,


माँ साथ खाना खाएंगे बोल


 सखी बन जाया करती है,


कभी मेरी कुर्तियां, कभी मेरी चुनरी ,


तो कभी मेरी साड़ी लपेट, शरमाया करती है,


कभी मेरे बालों को सहलाते हुए,


 मेरे बाल भी बनाया करती है,


अब तो मेरे कपड़े भी खुद पसंद करती,


और कभी मेरा श्रृंगार किया करती है,


किचन में मेरे साथ खुद आकर,


 हाथ बंटाया करती है,


तो कभी मेरे लिए, 


अपने हाथों से चाय बना लाती है,


साथ बैठकर घंटों गप्पे लड़ाती,


मेरी गलतियों पर अब ,


मुझे डांटा भी करती है,


हाँ मेरी बेटी, मेरी माँ बन,


 मेरे साथ समय बिताया करती है,,,



✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻


10/05/2021

शनिवार, 8 मई 2021

हर एक दोस्त ज़रूरी होता है

 *हर एक दोस्त ज़रूरी होता है*


दोस्ती नाम है विश्वास का, और निश्छल प्रेम का, भगवान ने जब हमें जन्म दिया तो सब कुछ निश्चित था , हमारे माता -पिता , भाई- बहन, रिश्तेदार,,,, सब कुछ। एक दोस्त , सखा, मित्र ही था जिसने हमें अपने मन से खुद चुना। और दो लोगों के बीच दोस्ती का रिश्ता तभी बनता है, जब उनके बीच वैचारिक समानता होती है। अल्प समय के लिए मतभेद ज़रूर हो सकते हैं लेकिन दीर्घकालिक देखा जाए तो दोनों के बीच विचारों की समानता पाई जाती है। दोस्ती में धर्म , जात - पांत, अमीर- गरीब का भेद नहीं होता। जहां दिल मिल जाये, विचार मिल जाये, दोस्ती हो जाती है। ऐसे में "हर एक दोस्त ज़रूरी होता है", क्योंकि हर एक दोस्त में अपनी एक अलग विशेषता, और अलग गुण होते हैं, और दोस्त तो वो होते हैं जो मुसीबत में सबसे आगे खड़े होते हैं। दोस्त की परेशानी, सुख- दुख, खुशी- गम, सब बाँट लेते हैं। इसलिए कहा जाता है,हर एक दोस्त ज़रूरी होता है।

                 

                दोस्ती सिर्फ 2 अनजान लोगों के बीच नहीं होती , बल्कि माँ - बेटी, पिता- पुत्र, भाई- बहन, किसी के भी बीच हो सकती है, और ना ही ये उम्र की मोहताज है तभी तो दादा-दादी और नाना-नानी, पोते-पोतियों के अभिन्न मित्र बन जाते हैं। तब रिश्ता पहले से भी कहीं और मजबूत हो जाता है। 


               निश्छल प्रेम के इस मजबूत धागे में कोई बड़ा -छोटा नहीं होता, बल्कि दोनों एक दूसरे के पूरक होते हैं। जिसे बहुत खूबसूरती और समझदारी से निभाना होता है। चाहे दोस्ती का कोई भी रूप हो बस विश्वास की डोर मजबूत होनी चाहिए। इसलिए तो दोस्ती की मिसाल दी जाती है।



✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻


07/05/2021


बुधवार, 5 मई 2021

बोनसाई

 बोनसाई



"अरे ! अभी नीतू की उम्र ही क्या है? अभी-अभी तो दुल्हन बनकर आई थी इस घर में , महज़ डेढ़ साल ही तो हुए हैं उसे इस घर में आये, अब नीतू और नवीन का साथ यहीं तक का था तो इसमें नीतू का क्या दोष?" विभा ने लगभग चिल्लाते हुए अपनी बेटी प्रीति से कहा,


 पर माँ,,,, लोग क्या कहेंगे? प्रीति  ने भी माँ को समझाने की कोशिश की। 


"लोगों की परवाह मैं नहीं करती लेकिन नीतू ऑफिस भी जाएगी और हर वो काम कर सकती है जो वो करना चाहे, जैसा रहना चाहे रह सकती है," विभा ने जैसे ठान रखी थी कि किसी भी कीमत पर वो नीतू का साथ नहीं छोड़ेगी।


 प्रीति अब अपने पापा विकास से बोली, "पापा अब आप ही समझाइये न माँ को, अब तो नवीन भैया भी नहीं रहे,बाहर कहीं कुछ ऊँच नीच हो गई तो...


 "बस!!!! अब हमें और कुछ नहीं सुनना... मैंने और विभा ने फैसला कर लिया है, हम नीतू को घर में बोनसाई की तरह नहीं रखेंगे, बल्कि हम उसकी पत्तियों शाखों को पल्लवित और मजबूत होते देखना चाहते हैं। अब हमारी एक नहीं दो बेटियाँ हैं, प्रीति और नीतू, और वह जब तक इस घर में है अपनी मर्जी से जी सकती है।" विकास ने विभा की ओर मुस्कुराते हुए देखकर कहा ...और अब तो हमें एक और कन्यादान की तैयारी भी करनी है,क्यों विभा? 


दोनों  की आंखों से खुशी के आँसू बह रहे थे। परदे की ओट में खड़ी नीतू अपनी कोरों के आँसू पोछते हुए पास ही रखे बोनसाई को बाहर ले जाकर ज़मीन में उसकी जड़ों को जमा दिया।




✍🏻तोषी गुप्ता✍🏻 


04/05/2021

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