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apne vajood ki talash me.........
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गुरुवार, 15 दिसंबर 2016

ऊंची होती उड़ान.....

ऊँची होती उड़ान ........


एक चिड़िया,
खुले आसमान में , 
स्वतन्त्र , स्वच्छंद,
दूर दूर तक अपने  पर फैलाती, 
तरह तरह की कलाबाजियां दिखाती, 
निरंतर और ऊपर और ऊपर उड़न भरती ,  
अपने में मस्त ........ अपने में मगन, 
अपने परों को साफ करती, सजाती, संवारती, 
अपने परों का खास ख्याल  रखती, 
उसकी यही खूबी , उसकी यही प्रतिभा, 
उसके साथी परिंदों को तीर सा चुभती, 
वो उसकी उड़न को रोक तो नहीं सके ,
पर धीरे धीरे उसके परों को नोचना शुरू किया , 
हर एक पर के नोचे जाने पर वह दर्द से तड़प उठती ,
चीखती, और उसके तथाकथित हमदर्द, हमसाथी, सफेदपोश, 
नकाब के  पीछे खुशियां मनाते और ताली बजाते , 
इधर हर एक पर नोचे जाने के बाद, 
वो चिड़िया अपना दर्द भूलकर, 
नए उत्साह, नए हौसले से और ऊँची उड़ान भरने की कोशिश करती , 
ये सिलसिला बढ़ता जा रहा था , 
उसके पर लगातार नोचे जाते 
और दर्द के बाद उसकी उड़ान , 
और ऊँची ...... और ऊँची....... और ऊँची.... होती जाती, 
हर दर्द के साथ वो यही सोचती , 
आखिर कब तक उसके साथी परिंदे , 
इसी तरह उसके पर नोचकर , 
उसकी उड़न पर मुश्किलें डालकर , 
अपनी उड़ान ऊँची दिखा पाएंगे .......? 
और क्यों उसके साथी परिंदे ईमानदारी और मेहनत से 
अपनी उड़ान ऊँची नहीं करना चाहते.....? 
क्या दूसरों के पर काटकर ही ऊँची उड़ान भरी जा सकती है.....? 

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बुधवार, 14 दिसंबर 2016

चिंता  

सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर्स के प्राइवेट क्लिनिक में आज हलचल कुछ कम थी।  मरीजों की संख्या भी कम थी।  आवक कम की वजह में पता चला कि कसबे के एक समाजसेवी संस्था ने आज निःशुल्क मेडिकल कैम्प लगा रखा है जहाँ पास के शहर के नामी गिरामी स्किल्ड डॉक्टर्स अपनी निःशुल्क सेवाओं के साथ निःशुल्क दवाओं का वितरण भी कर रहे हैं। दूर दराज के गांवों के भी बीमार ज़रूरतमंद आज इस कैम्प में एक आशा के साथ आ रहे थे और मुकुराहट लिए ढेरों दुवाएं देते चले जा रहे थे।  अचानक कैम्प में खलबली मच गई।  पता चला कि अवैध रूप से बिना सरकारी अस्पताल के परमिशन के मेडिकल कैंप लगाने पर उस समाजसेवी संस्था पर कार्यवाही का नोटिस मिला है। नोटिस मिलते ही संस्था के प्रतिष्ठित लोग कैंप से नदारत हो गए , आखिर एन मौके पर उन्हें कसबे के डॉक्टर्स से ही इलाज मिल सकता था।  कुछ समय बाद कसबे के डॉक्टर्स के शिकन भरे चेहरों पर असीम शांति का भाव था और इधर मरीजों के चेहरों पर पुनः चिंता के भाव उभर आये थे। 

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